#kavyotsav_2
ऐ! मन
दुःख में है क्यों?
तेरे लिए मैंने क्या न किया?
तेरे इच्छाओं का
तेरे तिरस्कार का
मैंने तो झुककर है स्वागत किया
ऐ! मन
दुःख में है क्यों?
तेरे लिए मैने क्या न किया?
समय का खेल है निराला बड़ा
तेरे कारण दोराहे पर हु मैं खड़ा
चाहा तूने जैसा,वैसा ही किया
गलिया जीवन की फिर सुनसान है क्यों?
ऐ! मन
दुःख में क्यों?
तेरे लिये मैने क्या न किया?
मेरे साँसों में थी गावँ की खुश्बू
आगे जाने की जिद तेरा शहर ले गया
है खड़ा अब दौर मोहभंग का
इस दौर में अब तू उदास है क्यों?
ऐ! मन
दुःख में है क्यों?
तेरा कहाँ मैंने सब कुछ किया।