निकले थे जो कफ़न बाँध के,
वो क्यों आज सौदागर बन गये..
कह रहे थे दुनिया बदल देंगे,
वो क्यों आज ख़ुद बदल गए..
खून से मिट्टी लाल हो गई,
होने वाला था एक सुनहरा सवेरा,
फिर क्यों रक्तरंजित शाम हो गई..
बस रहा था एक उम्मीदों का एक नया शहर,
पता नहीं कब इस शहर की गलियाँ बदनाम हो गई..
खून से मिटटी लाल हो गई ...
#अद्वैत