तकदीर में पता नहीं किसका नाम लिखा है।
तस्वीर में पता नहीं किसका चहेरा छीपा है।
जमाना बीत चुका..
जमाने से ढुढ़ रहे हे वो चहेरा....
ढुढ़ती हु क्यु उसको जीसको कभी देखा नही....
तस्वीर में पता नहीं किसका चहेरा छीपा है।
ये हवाओका गुझरना....
ये मौसमोका बदलना....
इनकी क्या वजह है पता नही...
ढुढ़ती हु क्यु उसको जीसको कभी देखा नही....
तकदीर में पता नहीं किसका नाम लिखा है।
ये पानी का छुकर निकल जाना...
ये बेरंग ज़िंदगी मे रंगोका यु आना....
इनकी क्या वजह है पता नही...
ढुढ़ती हु क्यु उसको जीसको कभी देखा नही....
तस्वीर में पता नहीं किसका चहेरा छीपा है।
✨?स्वाति?✨