रोशनी
मम्माssssssमम्मा
रसोईघर से निकलकर "क्यों ? चीख रही हो अब क्या आफत आ गई।"
"मम्मा, मैंने अपनी लाल चुन्नी और गॉगल्स यहीं रखे थे। मिल ही नहीं रहे।"
"कहीं और रखे होगें तुझे कुछ याद तो रहता नहीं है।"
"मम्मा सच्ची में यहीं रखे थे।"
झुंझलाते हुए "ओफ्फो! तो फिर क्या आसमान खा गया या धरती निगल गयी ?"
"वो देखो मम्मी बबलू को गले में मेरी चुन्नी और आँखों पर गॉगल्स।"
"बबलू, दीदी की चुन्नी और गॉगल्स वापस कर उसे कॉलेज जाने के लिए देर हो रही है।
"नहीं दूंगा, मैं सुपर मैन हूँ। दीदी के साथ ही कॉलेज जाऊँगा।"
"कॉलेज जाने के लिए अभी बहुत समय है।पहले स्कूल की पढ़ाई तो पूरी कर।"
"अरे! मम्मी पढ़ने के लिए नहीं जा रहा। कल दीदी आपसे बोल रही थी, न कि कुछ लड़के रोज उसे परेशान करते हैं।"
"हाँ तो क्या हुआ?"
"मैं उन सबकी बैंड बजाऊंगा, फिर कोई दीदी को परेशान करने की हिम्मत नहीं करेगा।"
"तू पिद्दी उनसे लड़ेगा।"दीदी हंसते हुए बोली।
"उसने हिम्मत तो दिखाई तुम तो बड़ी होकर भी डरती हो।"
"मम्मा वो लड़के हैं।"
"लड़के लंगूर होते है डरोगे तो पीछे आएंगे और आगे बढ़ोगे तो दुम दबाकर भागेंगे,एक बार हिम्मत तो करो।"
"लीजिए दीदी, अब आप इसे पहनकर सुपर वूमैन बन जाओ।"
गले में चुन्नी डाली और आंखो में चश्मा पहनते ही आत्मविश्वास से भर उठी।बड़े ही नहीं कभी कभी छोटे से भी शिक्षा मिलती है।आज वह उसने दृढ़ निश्चय कर ही लिया कि वह अब डरेगी नहीं बल्कि डटकर उनका सामना करेगी
मधु जैन जबलपुर