बहुत से किस्से अधूरे लिखे हुए हैं डायरी में ,तो बहुत सी अधूरी कहानियाँ भी बाट जोह रही हैं | समय की भी कमी नही नही हैं बस यह मन जो है न निमाणा सा , अलसाया सा रहता हैं बदलते मौसम में |
चाँदी की तारो पर झूलती यादे और सोने सी चमकती मुस्कुराहटे अक्सर घने दरख्तों के नीचे अपने वजूद को तलाशती हैं और फिर से बुनती हैं एक नयी कहानी , पुरानी कहानियो से इतर एक नयी कहानी | किस्से कहानियाँ कब पुराने होते बस हर बार फ्लेवर नया आजाता | सौंधापन बढ़ जाता | उदासी कही दूर क्षितिज में दुबकी नजर आने लगती हैं और सुवासित हो उठता मन का कोना बिना कुछ लिखे ही |
नीलिमा शर्मा निविया