हर पाठक एक यात्री होता है और हर....किताब एक यात्रा.और इस यात्रा में यात्री को जो अच्छे बुरे तजुर्बे होते हैं, उन्ही के आधार पर वह यात्रा के विषय में अच्छी बुरी राय बनाता है. कोई यात्रा सफल होती है और कोई असफल.जब वह इस यात्रा से लौटता है तो सबको इस यात्रा की कहानी सुनाता है. उसने क्या देखा ? क्या अनुभव किया ? कैसे कहाँ अच्छा लगा ? कहाँ बुरा लगा..और अंत में हाथ में क्या आया...यही बात मैं आपसे अमृता की बातें करते हुए महसूस करती हूँ...जो एक रूहानी एहसास मैं इस यात्रा में महसूस करती हूँ.वह जब आपको सुनाती हूँ तो वही प्यार सा एहसास एक प्यास आप सब में भी महसूस करती हूँ...मुझे लगता है कि जो ज़िन्दगी हम जी नही पाते हैं वह जब पढ़ते हैं, अनुभव करते हैं तो वही दिल को एक आत्मिक संतोष दे जाती है..
मातृभारती पर इस कहानी 'आधी नज्म का पूरा गीत - 18' पढ़ें
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