"फाग"
सखी आया फागुन ले के फाग,
जिया बौराया,
नीक लागे पिया संग दाग,
जिया बौराया।।
पीली पीली सरसो फूली,
अमरूदन पर मैना झूली,
देखो मारे जोगीरा काग,
जिया बौराया।।
गाँव गलिन में शोर मचा है,
सतरंगी सब साज सजा है,
अब रोम रोम गया जाग,
जिया बौराया।।
आज हिया से द्वेष निकालो,
सबलोगन के गले लगा लो,
खेलो होरी तेरे बड़ भाग,
जिया बौराया।।
गोरी के संग गोपी नाचे,
रंग पिरितिया के है साचे,
पूरी होगी"सागर" की आस,
जिया बौराया।।
राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"