अफ़सोस..... - Poem by Devanshu Patel
अफ़सोस.....
ये दिल के ज़खम दिल में दफन, राज़ ही रहे...
किस को कहे जब हमसफ़र हमराज़ ना रहे।
गम की न हैं परवाह हमें, गर ग़ैर से मिलते...
हर ज़ख्म उन्हीं के दिए, मोहताज ना रहे।
हमें आरज़ू थी गुन गुनाये प्यार के नगमे...
दिल की लगी अब क्या कहे अल्फ़ाज़ ना रहे।
सह लेते सितमगर, वो हर सितम तूने दिए...
मिल जाये ज़हर प्यार से ऐतराज ना रहे।l
किस मोड़ पे, ए ज़िंदगी, लाकर खड़े किए...
रिस्तें तो सभी हैं अभी, बस लिहाज़ ना रहे।
आखिर में कब हँसे थे हमें याद ना 'जाहिल'...
अब आइने के भी वो ही अंदाज ना रहे।
© Devanshu