कल सारी रात बरसता रहा यह पानी
गरजता रहा, तरसता रहा, सिसकता रहा यह पानी
दरख्तो ने चेताया, धरती ने भी समझाया
सबकी सुनी पर अपने मन की करता रहा यह पानी
कुछ लुट गया, टूट गया, छूट गया या कोई रूठ गया
मेरे ही सवालो से मुझे शरमसार करता रहा यह पानी
इस बार की बारिशो ने तो बीमार कर दिया है
अब जिस्म को और भी भिगोता रहा, गलाता रहा यह पानी
उसे याद न करें, भूल जाए हम
इन्ही कोशिशो को पानी पानी करता रहा यह पानी