Hindi Quote in Blog by NR Omprakash Saini

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हर रोज कोशिश करता हूं
तुम से दूर जाने की,
मगर तुम सपनों में आ मिलती
तुम्हारी यादें नहीं मिटती।

लाख कोशिश करता हूं
खुद को मनाने की,
तुम्हारी गली से ना गुजरने की
मगर दिल मेरी कहा सुनता,
खींच ले आता तुम्हारे घर की ओर
तुम्हारे घर की चौखट तो दिखती
मगर अब तुम वहां नहीं मिलती।
फागुन मास में जहां इंतजार में रहते
वहां बगैर रुके गुजर जाता हूं
मगर अब वहां तुम इंतजार में नहीं मिलती।
तुम्हारी यादें नहीं मिटती।

आज भी स्कूल की ओर घूम आता हूं
वो जगह बड़ा ही संकून देती।
कभी तु मिलेगी
दिल को ये तस्सली जरूर मिलती
मगर तुम नहीं मिलती
उस चौराहे पर जा खड़ा होता हूं
जहां से तुम सखियों संग गुजरती।
तुम्हारी सहेलियां तो दिखती
मगर तुम नजर नहीं आती
तुम्हारी यादें नहीं मिटती।

तुम्हारे संग दूर तक चले आना
तुम्हे हसते देख बेवजह हस देना
तुम्हारी बचकानी हरकते को
भूलाने की,
तुम्हें देख अनजाना बने रहने पर
तुम्हरा बेवजह रूठना ओर शब्दों की नाराज़गी,
लाख कोशिश करता हूं भूलाने की
मगर तुम्हारे गाल के डिंपल की स्मृति
इस आखों के स्वप्न से नहीं मिटती।
तुम्हारी याद नहीं मिटती।

लाख कोशिश करता हूं
खुद को कैद करने की
तुम्हारी बातों को भूलाने की
तुम से दूर जाने की
मगर तुम तो हवा सी हो
दिल को छू कर निकल जाती
तुम्हारा स्पर्श नहीं होता
फिर भी मैं अछूता नहीं रहता
हकीकत में तो नहीं मिलती
मगर रातों की निदों में मिल जाती
तुम्हारी याद नहीं मिटती

पहले दिन की मुलाकात,
दोस्ती फिर प्यार और फिर
आखिरी दस मिनट की वो बात
अब दिल से नहीं उतरती
आखों से गिरते मोती से आंसू,
होठों की मुस्कान और
गहरी जुल्फों की छांव बहुत सताती,
भूलना चाहता हूं
मगर रातों की निंद भूलने नहीं देती
तुम्हारी याद नहीं मिटती।

अल्ह सुबह सारे जहां की ख़बरें
घर की चौखट तक आ पहुंचती
मगर तुम्हारी कोई खबर नहीं मिलती
जानता हूं नंबर बदल गए।
फिर भी 7 अंक से शुरू 1 से खत्म पर
रिंग कर ही देता हूं
बात तो होती है मगर
आवाज तुम्हारी नहीं मिलती
तुम्हारी याद नहीं मिटती।

ये दिल बड़ा बगावती है।
हर रोज समझाता हूं
अब तुम मेरे से मोहब्बत नहीं करती
नहीं बात और नहीं फिक्र करती।
मगर जिद्दी दिल नहीं समझता
कहता है पास नहीं रहती मगर
साथ रहती है और
तुम्हारी तस्वीर की ओर खींच लाता।
सच कहूं तुम्हारी मासूम सूरत आज भी
दीवाना कर देती।
तुम्हारी याद नहीं मिटती।

लाख कोशिश करता हूं
तुम्हारी यादों को मिटाने की
तुम्हारे दिए सैकड़ों घाव को भरने की।
तुम्हारे खत के साथ तस्वीर को जलाने की
मगर हवाएं तिल्ली भी जलाने नहीं देती।
तुम्हारी याद नहीं मिटती।
तुम्हारी याद नहीं मिटती।

- एन आर ओमप्रकाश “हमदम”।
9783450868

Hindi Blog by NR Omprakash Saini : 111102366
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