आरंभ है प्रचंड,
सुनो काफ़िरों के झुंड,
इस आग को अब और न जलने दो..
ये देश है अखंड,
सुनो पापियों के झुंड,
अब और न हमको दहकने दो..
ये ज्वाला है प्रचंड,
क्यों कटवाने है अपने मुंड,
महाभारत को न फिरसे दोहराने दो..
गवाह है कालखंड,
सुनो बुझदिलों के झुंड,
इतिहास में हमें फिर से न जाने दो..
~हिमाँशु