#दिल की बातें
"वीर बनो,अभद्र नहीं"
मुझे मालूम है शायद मेरी बात कोई नहीं मानेगा, शायद इस पर गौर भी ना करे कोई और सुनना भी ना पसंद करे कोई लेकिन हक़ीक़त जो मुझे महसूस हो रही है वो ये है कि किसी भी देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान कर के कुछ हासिल नहीं होगा.. सोचना चाहिए एक पल ठहर कर कि कोई दूसरा देश,हमारे देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करे तो हमें कैसा महसूस होगा...
युद्ध ही करना है तो फिर सही तरीके से सीधे तौर पर युद्ध ही करो,अभद्र भाषा,अभद्र व्यवहार हमारी संस्कृति नहीं.. लेकिन इस देश में ऐसे हजारों लोग पहले से ही इतनी विकृत मानसिकता के हो चुके हैं कि सिर्फ और सिर्फ अभद्रता और अश्लीलता ही उनके दिमाग में भरी हुई है और इसकी अभिव्यक्ति खासकर सोशल मीडिया पर कर के वो अपनी विकृत मानसिकता की संतुष्टि करते हैं....
राम के नाम पर लड़ने, मरने वाले लोग क्या राम के आचरण से भी कुछ सीखे है।रावण ने राम की पत्नी का हरण किया था तो क्या राम ने बदला लेने के लिए रावण की पत्नी का हरण किया था...?
आक्रमण हमेशा सामने से किया जाता है और हमला छुप कर,अक्सर पीठ पीछे...
वीर बनो,असभ्य,अभद्र नहीं...आक्रामक बनो हमलावर नहीं..
प्रांजल,
22/02/19,
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