STORY OF IMAGINATION.. ?
आज से 2 साल पहले एक अजनबी हसीना से बंबई में यू मुलाकात हुई और उस मुलाकातो मे कुछ ऐसी बात हुई..
उन्होने बड़े मासूम होकर पूछा था हमसे कहाँ से है आप..?
हमने हमेशा की तरह फ्लर्ट करते हुए कहा हम प्रेम नगरी से हैं..
उन्होने हमसे कहाँ वाह क्या बात है़...प्रेम नगरी से...? तो ठीक है पर रहते कहाँ है..?
हमने उनसे हमारे अंदाज में कहा की हम अल्फाजो मे रहते हैं..
उन्होने मुस्कराते हुए कहाँ.. वैसे आप करते क्यां है अल्फाजो में रहकर.?
सच कहे उस दिन पहली बार हम दुविधा में थे की फ्लर्ट हम कर रहे हे थे या वो.? फिर भी हमने जवाब दिया..
हमने कहा अल्फाजो मे रहकर लोगों के जज़्बातो को लिखने की गुस्ताखी किया करते हैं..
फिर क्या हुआ पता है आपको..? नहीं पता..? चलो हम कहते हे अब की बार वो कन्फुझ और हम एकदम टनाटन.. ???
कुछ दिनों पहले इत्तेफाक से फिर उस अजनबी हसीना से मुलाकात हुई..
मुलाकात कुछ ऐसी हुई की हम बैठे थे उस कैफे में वही हमारी पुरानी कोफ़ी के साथ अपने पुराने अंदाज़ में..
जब वह कैफे में आई उन्होंने चारों ओर अपनी नजर घुमाई पर उन्हें कोई ख़ाली जगह नजर ना आई...
फिर क्या था.... ?
फिर वह हमारे करीब आई और उन्होंने हमसे कहा कि can I seat ur beside ??
हम कोई प्रतिउत्तर दें उससे से पहले तो वह बैठ ही गई..
उनके बैठने से ही हमें पता लग गया की हम पहले भी कहीं शायद मिल चूके थे..
हम कुछ बोले उससे पहले ही वो बोल उठी कभी कबार हमारे जज़्बातो को भी लिखा करो..
हमने कहा हम किसी के कहने पर नहीं लिखते हम जो महसूस करते हैं वही लिखते हैं..
वो हमारे करीब आई और आंखों से आंखें मिलाकर कहाँ क्या वाकई में आप हमारे जज़्बातो को नहीं समझते..?
फिर क्या हम हमेशा की तरह खामोश रहे और कुछ कह ना सके..
नज़र चुरा कर जा रहे थे कि.. उन्होंने हमारा हाथ थाम लिया.. और हमसे कहा की आपने अबतक हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया..
इस बार हमने थोड़ी हिम्मत दिखाई और उनसे कहाँ की..
कुछ पलों को यूं ही जीया जाता है और उन्हें संभलकर रखा जाता है.. यादों से जुड़े उस शख्स के पीछे दौडा नहीं करते..
क्योंकि अक्सर दुर से दिख रहा पानी कभी प्यास नहीं बुझाता..
उन्होंने बड़े मासूमियत से पूछा क्या हम आपके काबिल नहीं..?
हम थोड़ा मुस्कुराए और वहां से चल दिए.....
@अभी