भीड़ से निकल के... दूर तक जाना है।।
जो रास्ता न मिले,तो अपना एक बनाना है।।
ऐ हवा,तू कर ले चाहे जितनी आज़माइशे।
तेरे इन जोको से हमे नही बुज़ जाना है।।
कहा है ख्वाइशें हमे मंज़िलो को पाने की।।
इन रास्तो से हमे तो बस याराना निभाना है।।
रंग लेके सारे हमे तितलियों से उधारीमे।।
बेरंग सी तस्वीर को कुछ रंगो से सजाना हे।।
मुक्कमल हो जाये हम, ये ख्वाब नही हमारे।।
हमें तो इस अधूरेपन में ही जी भर कर जी जाना है
नहीं बनाने हमे चाँद पे जाके अपने ख्वाबो के आशियाने।।
हमे तो बस अपनी ज़मी से ही रिश्ता निभाना है।।
न उड़ने की ख्वाइश हे..न आसमा को छूने की तमन्ना..
मिटटी से ही बने हे हम,मिटटी में ही मिल जाना है।।।
पर जब तक मिटटी में ना मिले तब तक थक के न बेथ जाना है।
इस कातिलाना ज़िंदगी को हमे बेखोफ जी के दिखाना हे।।
◆ANV◆