Hindi Quote in Story by Amrita shukla

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सुख-दुख (लघुकथा)

रोज की तरह शाम को कॉलोनी में जब सब्जी वाला आया था। निशा और विनिता सब्जी खरीद ही रहे थे तभी मीना जी कहने लगीं कि प्रज्ञा को कल ही अस्पताल से घर लाए हैं ।सर्दी के कारण भरती किया था ड्रिप भी लगी थी। सुन कर बहुत बुरा लगा। प्रज्ञा मीना जी की पोती है और मात्र दो वर्ष की है। वैसे जन्म के समय से ही बच्ची को इसी तरह की समस्या बनी हुई है। मीना जी के जाने के बाद हम यही बात कर रहे थे कि बहू की गोद भराई, बच्ची के जन्म की पूजा, नामकरण और उसके बाद के दोनों जन्मदिवस पर अपने   पडोसियों को भूलकर रिश्तेदारों और परिचतों   को बुलाया था। पर आज यह दुख पडोसियों से साझा कर रहीं हैं। पडोसी ही आपके हर दुख में सबसे पहले खड़े होते हैं। इसलिए सुख में भी उन्हें याद करना चाहिए।

डॉ अमृता शुक्ला 

Hindi Story by Amrita shukla : 111090631
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