काम ही ऐसे होने चाहिए कि स्वयमं भगवान ही आकर मीले |
में नंगे पेर कहीं न जाती घर में भी पांव में चप्पल होती ही है | पहले भी काफी सालों पहले भी थोडे महीनों सुबह गई थी | सुबह उठ कर काफी महीने नाम जपा है | आज भी मुह में होता ईश्वर का नाम | जब कभी खुद के मनका न हुआ भगवान से जगडा भी कीया है | नाराज भी हुआ करती थी | पर तब समझ ना थी कि वो भला चाहते है | पर हर मनोकामना पूरी कि है सोचा न था वो भी दिया है | कुछ महीने पहले की बात है हमारे घरके सामने ही मंदिर है | मेरी सांस को बहोत तकलीफ हुई थी सुन कर की मैं नंगे पांव जाने वाली पहले दिन जा कर आई तब बताया | बहो समझाया कि कुछ न होगा और कुछ हुआ ही नहीं छाले भी ना पडे न कुछ हुआ | तीन दिन शाम को लौट रही थी, सुना की रोज आया करना | पर मैंने कहां मैं रोज न आ सकु मुझे घर भी देखना होता है | आप आना मीलने जब चाहो तब | तो आए दुसरे दिन चरवाहा बन बकरीयां साथ थी | मैंने बात भी कि पर रात को पता चला कि किनसे बात की क्युकि उनसे मुझे बील्वपत्र का पेड थोडा कटवाना था | बोले आज नहीं कल आऊं तो काट दु | पर मन ही न कर रहा था उनसे काम करवाने को तब पता चला कि ये तो स्वयमं भगवान ही थे | बात कर रही थी तब लगा भी कुछ अलग ही प्रभाव है | फिर अभी थोडे दिन पहले आए थे | चरवाहीन बन बकरीयां साथ ले कर | मेरे भाई के हाथों पानी पीया | बहोत ही प्यासा सामान्य व्यक्ति एक जग पानी पी सके उसने दो पीए | पानी भाई के हाथ पीया जान गई | पर पता नहीं क्यु ? मीलने का मन न करता मतलब वो हमसे ही लगते शायद माँ कहा है तो इसलिए !!! युतो रोज ही नाम जपती जब समस्या लगे जो खुद से न सुलझे तो बताती तो केहते कभी खुद कुछ दिखाते | अजीब पहेली सुलजीसी, पर ये ऐसा सवाल है सूर्य पूर्व से ही क्यु निकलता !?! ...ॐD