भुल गए......
आंखो मैं बीठा कर रख दिया
हम दिल मैं उतारना भुल गए.......
तेरे आने के इंतजार मैं हम
पर वखत का पहियें ने एक
पल भी नहीं सोचा तेरी याद
मैं हमारी उम्र गुजरती गई हम जींदगी मैं हसना भुल गए........
वखत तेजी रफ्तार तो चलता
रहा आप तो हमको भुला चुके होगे,
पर हम तुमे ख्याल से निकालना भुल गए......
हम प्यार में तो एसे लिपट गए की ,
हम इस समंदर मैं उतर तो गये
पर बहार निकलने का रास्ता भुल गए.......
हमको नहीं पता था की
प्यार भरे आलिंगन में एक
चहेरा और भी था जीसे
हम पढना भुल गए.........
हम चल पडे थे "प्यार का सफर" कांटने
पर हम एसे मोड पें आ गये जहा से
वापस आना भुल गए........
हम राह कांटते कांटते
मंजिल तक आ पहोंचे,
तब तुम थे पर तुमने हमको देखते
ही अं देखा कर दिया,पर हम
तुमसे नजरे छुडाना भुल गए........
ए खेल तो खुदा तो खेल रहे थे
हमको मिलना का और जुदा करने का
पर इस खेल का असर एसा हुआ की
हम की हम खेल खेलना तक भुल गए.........
हम तुम पे मरते रहे,
तुमने हमको तन्हा कर दिया
हम ने वफाओ से तुमको पाला,
पर तुम हमसे बात करना
तक भुल गए........
जींदगी के इस मुकाम मे हम एसे गीरे
की हम फीर से उठना तक भुल गए......
शैमी ओझा........