बदलाव / परिवर्तन ही जीवन का नियम है | अपना अपना फर्ज याद रखना है बस ! पहले भी भलाई का सोचते आज भी सोचते | बस ! फर्क इतना है कि केहने का तरीका बदला है | अब सब की सुन कर जो सही वो करना है बस ! पर नया नया ताजा ताजा हो तो अमल करने में थोडा ध्यान रखना पडता है क्युकी आदत न हो तो जो कुछ करने से पहले रट रट करना चाहिए | आदत बन जाए तब कुछ फिक्र नहीं रेहती | जैसे केहने से पहले जांच पडताल कर (पसंद - नापसंद का खयाल रखते) ही सभ्य भाषा में बोलना चाहिए | ...ॐD