हाथ रख दी जो कविता
फिर क्या था !
साल बाद अचानक से
ये क्या हुआ ?
सोचते चले गए
फिर ऐसे ही दिल का हाल लीख दिखाया
अपना इतना बताया
माता पिता संग रहु
बस फिर क्या था
सखी से जाना अकेले में बुला सके
तो बुलाना चाहा
पर मना कर दिया
ना ना आऊं
कुछ समय बाद सोचा कि कहीं बुरे निकले तो
तभी ईश्वर ने कहा कभी न की बत्तमीझी तो काहे का बुरा
बीच में कोशिश की टकरा के छुने का ढोंग रचा
पर अजनबी ना जी ना ना छु पाए हां
एक बार पीछा करते पहोंचे जहां काम करु
देख लगा कहीं देखा न जाने कहां देखा और घर को चली
मजाल है नजर कभी इधर उधर कीसीको देखने धुमी हो
ना जी ना घर की इज्जत अपने हाथ
फिर खुद को भी चाहिए था अपने जैसा
जो समझे मीले बीलकुल वैसे
मांगा था उनसे बढ़कर
सोचा था उनसे बढीया मीला
क्युकि केह रखा था रबसे
मेरे लिए सही हो वो मीले मुजे
न वो जाने न मैं जानु
फिर भी प्यार भरे दिल ने कभी अलग नहीं होने दिया
कीतनी ही गलत फैमीयां थी
पर एक के बाद एक दुर होती चली गई
उतना एक दुजे को समझते गए
कभी न माता-पिता की इज्जत पे आंच आने दी
न बीबी के प्यार में अंधा हो फैसला किया
जो सही है वही कीया
बहु है तो क्या हुआ
बेटी बना रखा है
फीफ्र फरे
गलती पर डांट लगा समजाए भी
ऐसी है मेरी सासु मां
मां ही है
हक है मां-बाप का बच्चों को डांटे
बहोत अच्छा लगे
प्यार से समझाएं
बहोत अच्छा लगे मीठी नोक झोंक
जब घर आ लगाया प्यार से गले
इतना सुकुन मीला क्या बताऊं मां
हां ! याद आया बता दुं
नया नया करने का शोख
दीखाया जब
तब पहली बार कोई मेरे लिए दिल से खुश हुआ लगा
मीले बीछडे
फिर मीले
फिर बीछडे
पर दिल न बीछडे
दुर रेहकर भी
खयाल रखा
प्यार, विश्वास से बंधे है
मर्यादा मान रख साथ है...ॐD