अजनबी
आज आए हो अजनबी बनकर ।
जा रहे हो अपना बनाकर ॥
सूरुर सा छा गया जिस्म में ।
जा रहे हो दिवाना बनाकर ॥
बरबाद होना था बरहाल हुए ।
जा रहे हो बेगाना बनाकर ॥
आश्नाई खूब निभाइ इश्क में ।
जा रहे हो आश्ना बनाकर ॥
जानेमन इब्तिदाए इश्क में ।
जा रहे हो पगला बनाकर ॥
जीने ना देगी जूस्त्जू तेरी ।
जा रहे हो तन्हा बनाकर ॥
सखी संगदिल किस तरह युं ।
जा रहे हो जा ने जा बनाकर ॥