गुजरात की भूमि धन्य है जिसने सबसे पहले किसी पारसी को अपने यहाँ शरण दी.जब तलवार के बल पर धर्म को गति देने का काम अरब से बढकर पारसियों तक पहुँचा ।पारसी सन्न रह गये उन्हे अपने देवता और अपनी शान्तप्रियता पर पूरा भरोसा था .परन्तु शीघ्र ही यह भरोसा टूट गया और विवश होकर उन्हें गुजरात की धरती पर शरण लेनी पडी ।