कैसे समजाये?
हम चुप रहे पर हमारी कलम बहुत कुछ बोल गई
होठ चुप रहे आंखों लेकिन आंखे कहा मेरी सुनने वाली थी.......
पतंग तो सिर्फ दो दिन ही उडती है, मन को हसांती है, वो पल हमने खुल को जी लिए पर दिल हमारी सुनता कहां, पर ए दिल को कैसे समजाए हम नवा.......
मन तन्हा था इश्क रुस्वा था पर ए घाव हमने छुपा दिये, दिल रो रो कर पगला गया इसे हम कैसे
समजाये?
तेरा हुस्न मेरे दिल को बहेका गया, तेरी बाते तेरी यादे मन को छु गयी पर हमारा दिल तो रो कर सारे घाव पी गया पर ए दिल को कैसे समजाये?
आपने पल्को को संभालो मत करो पागल
बहुत मुश्किल से बचे हे हम ए भुखार से पर
हम कैसे समजाये ए नादा दिल को.......
शैमी ओझा .....