जिधर देखता हूँ
उधर शहर ही शहर है,
खड़ा हो जाऊँ
तो दूरियां दिख रही हैं।
जिधर देखता हूँ
उधर सत्य ही सत्य है,
कड़ी पहरेदारी में
बड़े नुकसान हो रहे हैं।
जिधर देखता हूँ
उधर तूफान उमड़ रहा है,
कोई मनुष्य को बता रहा है
कोई बहरा, सुना जा रहा है।
जिधर देखता हूँ
उधर प्यार ही प्यार है,
समय के छिलके
जिधर देखो, बटोरे जा रहे हैं।
-महेश रौतेला