गैरों से चोट खाते हैं तो
अपनों के पास आते हैं
जब अपनों से मिले चोट तो कहाँ जाएं हम।
दिल तड़पे या आँखें छलके
या सीने में तीर चुभे
फिर भी हँसकर पी जाते हैं सारे गम।
तुम्हें होश न न खबर सही
फिर भी तू है मेरी दुनिया
क्यों तेरी इस बेरुखी से होती मेरी आँखें नम।
तू हमराही मेरे जीवन का
तू ही मेरा भगवान है
तू चाहे या न चाहे पर तुझपे ही मिट जाएं सनम।।