हर रास्ते को चीर कर हैं आया एक लड़का ।
देस की हकीकत देख थोड़ा सा वो भडका ।
कुछ पाने की चाहत में हर वक़्त था वो तड़पा ।
एक मोके की नजाकत देख लगाया उसने तड़का ।
लाया था वो साथ मैं उम्मीदों की टोकरी ।
ढूंढनी थी उसको पहले छोटी -मोटी नौकरी ।
खाई लाख ठोकरे पर भरदी उसने पोटरी ।
लग रहा हो मिल गई थी जैसे कोई लॉटरी ।
इरादों पे अड़ा वो रास्ते पे था खड़ा ।
पेर थे जमीन पे, पर वो आसमान से जुड़ा ।
कुछ पाने की चाहत में वो अपनेआप से लडा ।
बीज था वो छोटा सा पर आज पेड़ हैं बड़ा ।