नारी तो जन्म से अबला है,
मर्दों से सहारा मांगती है।
दुनिया को जन्म तो देती है,
अपने लिए गुज़ारा मांगती है।
बदकिस्मत अबला नारी की,
ख़ामोश कहानी चलती है।
हर युग के बदलते साये में,
इसकी तकदीर बदलती है।
कभी बाबुल से,कभी भाई से,
कभी इज्जत के रखवाले से,
कभी अपनी कोख के जाये से,
कुछ प्यार उधार मांगती है।
मोल पडते इस अभागी के,
बाजारों में, दरबारो में,
नंगी नचवाई जाती है,
मज़हब के पहरेदारों में।
इसको इज्ज़त कहने वाले जब,
तूफान हवस का बन जाये,
फिर अपना आप बचाने को,
जीवन से किनारा मांगती है।
नारी तो जन्म से अबला है,
मर्दों से सहारा मांगती है....?????