प्यार.... एक ऐसा शब्द, ऐसी फीलिंग्स जो मुझे आज तक समझ ना आई। प्यार होता क्या है? प्यार शरीर से ही क्यों होता है? चाहे वो शक्ल सूरत हो या उसकी आँखें, चाहे उसकी स्माइल हो या पूरा का पूरा शरीर यानि उसकी पर्शनालिटी। यह बात लड़का लड़की दोनों पर लागू होती है चाहे वो लड़का हो या लड़की। फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन का नियम हर जगह लागू होता है। कभी बुरी शक्ल सूरत देख कर मन में भावनाएं क्यों नहीं जागती और अच्छी और सुन्दर शक्ल आँखों में क्यों बस जाती है। चेहरा भले भूल जाय लेकिन अक्श हमेशा आँखों में रहता है। तो फिर प्यार क्या होता है? क्या खूबसूरत चेहरा प्यार है या किसी के शरीर को प्राप्त करना प्यार है? क्या आम शक्ल वालों के पास दिल नहीं होता या उन्हें प्यार करने का अधिकार नहीं? हर किसी की ख्वाहिश क्यों होती है कि सामने वाला शुभान अल्लाह हो बेमिशाल हो कयामत हो और न जाने क्या क्या....।ये प्यार शरीर से शुरू होकर शरीर पर ही क्यों खत्म हो जाता है? यह मैं आज तक समझ नहीं पाई।।