देश में होनेवाले चुनाव है , तो हर एक के पास अपने
सुझाव है ।
चुनाव के कडे इंतजाम हैऔर शादी-ब्याह जैसी संसद में
दोडधाम है ।
नेताजी खडे रहेंगे भाषण देने पहनकर बंडी-कोट,
जनता तैयार रहेगी चोट खाकर, देने को वोट।
नेताजी लुटाऐंगे खूब नोट ।
आंकड़ों का यह अजब खेल है ।
सच पूछो तो इन नेताओं की असली जगह तो जेल है ।
पर क्या करें, देश में होने वाले चुनाव है ।
लोकतंत्र का यह पर्व है, हमे तो इस पर गर्व है ।
नई मशीनों ने अब चुनाव संभाला है, विज्ञान और
विकास का बोलबाला है ।
कागज पर थप्पे लगाने से अब मिली छुटी,
मगर नेताजी की नियत अभी है झूठी ।
पर क्या करें , देश में होने वाले चुनाव है ।
हर एक के पास अपने सुझाव है ।
लोगों में अब जागृतता आई है ।
वोट करना है धर्म और अधिकार हमारा यह
बात समझ में आई है ।
जनता हर बार मुँह के बल पर गिरी और पछताई है ।
इसलिए वोट देने से गभराई है ।
भूलो मत, हमारे पास देश की प्रगति की यही एक मात्र
चाबी है ।
पर क्या करें, देश में होने वाले चुनाव है ।
हर एक के पास अपने सुझाव है ।
हर राजकीय पार्टी का अपना नारा है , लोगों की
समस्याओं का न कोई किनारा है ।
सोच लो, देशवासीयो, जो लगाए तुम्हारे देश कि नैया
पार ,उसे ही तुम पहनाना विजय का हार।
उठो ! देशवासीयो अब तुम्हारी बारी है ।
सक्षम को चुनो, वरना हर बार जनता चुनाव के दिन
जात-पात के नाम पर दिल को हारी है।
पर क्या करें, देश में होने वाले चुनाव है ।
यहाँ हर एक के पास अपने सुझाव है ।
प्रणाली अंजारिया।
7/1/19
8:30