"वो प्यारे से आत्मीय खत"
खतों के सिलसिलों के बंद होने के साथ जीवन और संस्कृति में बहुत कुछ खत्म हो गया.. पहले चिट्ठी-पत्री में साहित्य,संस्कृति का भी ज्ञान और विकास होता था,आजकल बस औपचारिकताएँ... बहुत कुछ अच्छा, पावन ज़िंदगी से खो चला है जिसे मैं बहुत याद करती हूँ...
प्रांंजल,
7/1/19,5.20P