राख...
कैसे रिश्ते ये... कैसे ये नाते है...
अपना ही खून हमे कहा अपनाते है...
प्यार कहो या कहो वफ़ा...
सबकुछ तो सिर्फ बातें है...
रिशतें कहो या कहो अपने...
सबकुछ तो सिर्फ नाते है...
बातें लोग भूल जाते है...
नाते है टूट जाते है...
कोनसी कसमें कोनसे वादें...
यहां अपने पीछे छूट जाते है...
कितना भी कहलो अपना किसीको...
कोई ना अपना मानेगा...
आग लगाये सारी दुनिया तो क्या...
एक दिन मरने पर अपना खून ही तुझे जलाएगा....
जान ले सच है क्या दुनिया का...
कोन तुझे अपनाएगा...
रिस्तेें झुटे, वादे झुटे... झुटे है नाते यहां...
अपनो से पीछा तू छुड़ाए...
ये अपना ही बचाएगा...
मर गया जो कल तू, तुझे यही आग लगाएगा...
यही है जीवन जी ले इसको...
भाग के तू कहा जाएगा...
कसमे वादें प्यार वफ़ा सब....
साथ ही रह जाएगा...
भूल के सब कुछ जिले पल ये....
सबकुछ तो राख होजाएगा....
हर्षद मोलिश्री....