मेरी नवीनतम ग़ज़ल
# आँखें खोलीं तो देखा..
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई , ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई ।
दौर ए गम में भी खुशियाँ तलाशीं मगर , देखते देखते दोपहर हो गई ।।
ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई …….
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई .......2
सुबह चिड़ियों की चहकन सताने लगी , अब तो भँवरों की गुंजन जफ़ा हो गई ।
गीत कोयल के भी अब क्या भाएँ मुझे , मेरी चाहत से ओ बेख़बर हो गई ।।
ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई …….
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई .......2
अब सितारों कोई ऐसी धुन छेड़ दो , दिल की टूटी हुई धड़कने जोड़ दो ।
दास्ताने तसब्बुर ग़ज़ल कह रही , शिस्कियाँ दर्दे दिल की बहर हो गई ।।
ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई …….
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई .......2
जिंदगी गीत है साज़ बजने तो दो , वादकों मेरी चीखों को संगीत दो ।
था तकब्बुर उसे या थी मेरी ख़ता , फिर भी लड़ते झगड़ते गुजर हो गई ।।
ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई …….
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई .......2
इयूँ फ़सानों वह मेरे शामिल न थी , मेरी हस्ती मगर उसके काबिल न थी ।
इसको पन्ना मुकद्दर कहें न कहें , जो पराई थी वह हमसफ़र हो गई ।।
ऐसी बोली ओ बोली ज़हर हो गई …….
आँखें खोली तो देखा सहर हो गई .......2
-पन्ना की कलम से