श्रध्दा है नहीं किसीको आज अपनी संस्कृति में,
श्रध्दा है तो सिर्फ और सिर्फ संसार की विकृति में,
श्रध्दा है नहीं किसीको आज पूजा अर्चना में,
श्रध्दा है तो सिर्फ और सिर्फ साधक की शक्ति में,
श्रध्दा है नहीं किसीको आज माँ की दृष्टि में,
श्रध्दा है तो सिर्फ और सिर्फ भक्त की भक्ति में,
श्रध्दा है नहीं किसीको आज नारी की प्रकृति में,
श्रध्दा है तो सिर्फ और सिर्फ नारी की आकृति में,
श्रध्दा है नहीं किसीको आज देह की मुक्ति में,
श्रध्दा है तो सिर्फ और सिर्फ "पागल" की पंक्ति में।
✍?"पागल"✍?