हां मैं लड़की हूं
कुछ बनने की आशा में ,एक आशा दीप जलाती हूं ।
अपने सपने सच करके पहचान बनाना चाहती हूं ।
बनना नहीं है बोझ कभी, मैं बोझ उठाना चाहती हूं ।
हां मैं लड़की हूं
जीवन जीना चाहती हूं।।
है उद्देश नाम करूं देश का ,काम वो करना चाहती हूं ।
नव विकास के सपने ले, एक कोशिश करना चाहती हूं। मर्यादा कि गौरव संग ,भाग्य बदलना चाहती हूं
हां मैं लड़की हूं ।
जीवन जीना चाहती हूं ।।
बोकर स्नेह बीज धरती पर, मुस्कान बांटना चाहती हूं। उछल सागर की लहरों पर शिखरों तक जाना चाहती हूं। श्रम के विश्वासों से ही मंजिल पाना चाहती हूं। हांमैं लड़की हूं ।
जीवन जीना चाहती हूं।।