आंगन में किसी आड़ से,
झाक रही थी वो यमनी बाहर,
दो ही चीजों के इंतजार में,
या तो रोटी गिरता ऊपर से,
ईश्वर के रहम से,
या तो बम गिरता,
उस दानव रूपी उड़ते उड़न खटोले से,
दोनों ही से उसकी भूख शांत होने वाली थी,
एक से पेट की,
और एक से काले जीवन की।
© Krishna Katyayan 2018