"प्यार का अहसास"
कबख़्त ये 'प्यार का अहसास 'भी कितना अजीब है!!
सुनिए .......
"प्यार के अहसास" की जुबानी !!!
हर रोज उसके लिए जन्मता हूँ !
उसके लिए रात भर जगता हूँ !
रूह -रूह में बसता हूँ !
फिर भी उसे पता नहीं ??
मेरे पागल दिल ने कहा कहदो उसे
तो कहता है!!!
मैं कोई "कहानी" नहीं जो आँखों से पढ़ले वो
' शब्द 'नहीं जो उसकी कविता बन जाऊ
" बात "नहीं हूँ! जो मुँह से कह दिया जाए
"प्यार का अहसास हूँ" मैं जो ना जबरदस्ती किया जा सकता है! और ना ही करने को कहा जा सकता है !
मैं सिर्फ हो जाता हूँ! कब.... कहा ...कैसे .......बस हो जाता हूँ टक्स dipu✍