होने लगी दिल से दिल की दोस्ती सी हे ,
ख़ामोश रह कर भी सारी बातें हो चुकी सी हे ,
नज़रें मिल ने की ख़्वाहिश से ही यूँ ज़ूकी सी हे ,
लगता हे जैसे रात की चाँदनी भी तेज़ रोशनी सी हे ;
हाथों में ले हाथ दोनो कुछ यूँ साथ से हे ,
साँसे भी लगता हे कुछ बढ़ चुकी सी हे ,
जैसे ये सौदा-बाजी भी उनकी बेशर्त सी हे,
एक हार के बैठा है सब कुछ ओर दूजे की भी हार में जीत सी हे ...।
- ईशा शाह