मम्मी सोनू को पढ़ा रही थीं -"सोमवार , मंगलवार ,बुधवार --।" कि अचानक बीच में ही सोनू ने बड़े भोलेपन से पूछा -"मम्मी इसके बाद परिवार आएगा न ?"
उसकी बात सुनकर मम्मी हँस पड़ीं। उन्होंने कहा,"नहीं बेटा, परिवार दिन का नाम नहीं है। परिवार तो मम्मी- पापा, दादा-दादी, बुआ ,चाचा-चाची और बच्चों से मिलकर बनता है।"
"तो मम्मी, हमारा परिवार तो अधूरा है। आप लोगों ने तो दादा-दादी को अकेले छोड़ दिया है।" सोनू ने यह बात अनजाने में ही कही थी पर उसकी बात बिल्कुल सही थी।
परिवार के बिना कोई भी वार अधूरा ही है। यह मम्मी को समझ में आ गया था। उन्होंने सोनू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,"हाँ बेटा, अब दादा-दादी को हम लोग हमेशा साथ में ही रखेंगे ।"
यह सुनकर सोनू ख़ुशी से झूम उठा।
डॉ. शैल चन्द्रा
रावण भाठा, नगरी
जिला - धमतरी
छत्तीसगढ़