"माँ" ****
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मेरी प्यारी माँ को मेरा प्रणाम :
तुम्हें पत्र लिख रही हूँ, आंखें मेरी नम है,
जीतना भी मै लिखती जाऊ शब्द परते कम है ।
कितने कठिन परिस्थितियों से गुजरी है तू :
तू त्याग, प्रेम, प्रेरणा, शक्ति, मर्यादा कि मूर्ति है ।
माता-पिता का किरदार निभाया तुने, जब से आंखे खुली है
तब से पाया है तुम्हें, पिता की कमी कभी महसूस नहीं होने दी, दिल टूटा है तुम्हारा, पिता की याद में कितना रोई
हो तुम, कई रातें नहीं सोई हो, तपती धूप में जली हो।
हमें अपने ममता की शीतल आंचल में चुनी हो,
मेरे दुखों मे मुझे संभाला, मेरे सुखों मे भी खुशी कि आंसू
रोई हो, माँ तुम मेरी कितनी चिंता करती हो।
माँ तुम मुझे कभी छोङ कर न जाना, परमात्मा से
प्रार्थना है कि हर जीवन में मुझे तेरी कोख मिले।
बेटी से माँ बनी तु, माँ मै तेरी बेटी, इस बेटी ने भी जन्म दिया
दो नन्ही सी बेटी, अब मैं भी तेरी छवि लिए तेरा किरदार
निभा रही हूँ * फूलों से खिले इस बगिया को अपने प्यार
से मेहका रही हूँ।।
धन्यवाद "माँ"
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