तुम लाल रक्त बहाओगे,
हम हरे रक्त से नहाएंगे,
तुम बंदूके लेकर आओगे,
हम तलवारे लहराएंगे,
काटेंगे तुम्हे, केटेंगे खुद भी,
मिट्टी में मिल जाएंगे,
ये तेरा है वो मेरा है,
वो किसका है वो कैसा है,
ना जानना है ना जान पायेंगे,
ईश्वर के बंटवारे में,
हम खुद लड़ कट मर जायेंगे,
उसको क्या है वो आज भी वही है,
कल भी वही था और कल भी वही है,
रक्तहीन है,रंगहीन है,
लाल विहीन है हरा विहीन है,
तुम अपने रक्त पर इतराते हो,
कल तो तू भी, रक्तहीन है, रंगहीन है।
@Krishna Katyayan 2018