" स्याही" -
इस वक़्त और कलम की सगाई हो गयी - 2,
मानो जैसे ये वक़्त इस कलम की लुगाई हो गयी।
वक़्त ने पूछा कलम से तुझमें कितनि है ताकत?
कलम ने कहा मेरी स्याही की हर एक बूंद में
इतनी है ताकत - जैसे भारत वर्ष में "नरेंद्र मोदी है शासक।
वक़्त कम है, स्याही को चलना है,
क्यों कि उसे हर लम्हे का आईना बनना है,
आईना हर वक़्त की सच्चाई है।
ये स्याही मेरे कलम की रचाई है,
जिसमें सिर्फ़ सच्चाई है।।