Hindi Quote in Shayri by Seema Shivhare suman

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कविता जरा बड़ी है लेकिन एक कड़वा सत्य

"एक कविता ऐसी भी"


पिंजरे की बुलबुल तो उड़ गई
मैं घर- तज कित जाऊँगी।
साजन की साँसो से बंधी हूँ!
इर्द-गिर्द मंडराऊँगी।
अभी कोई *तारीफ* करे ना!
मर जाऊँगी, तब जाकरके बोलेंगे।
एक कविता ऐसी लिखूंगी 
पढ़कर सारे रो देंगे।
जीवन का कटु सत्य लिखूँगी
अपना आपा खो देंगे।

कोई मेरे संग संग चलती थी
रूठी रूठी तन-तनकर
चौके में महका करती थी
दालों की खुशबू बनकर।
पायल का था टूटा घुंघरू 
फिर भी छन -छन करता था।
जीवन में है ,मौजूदगी तुम्हारी
एहसास का आलम भरता था।
फिर उग आओ, जीवन बगिया में
बताओ! कौन सा बीज हो वो देंगे।
एक कविता ऐसी लिखूँगी 
पढ़कर सारे रो देंगे।

अचार की नहीं, मेहनत की महक थी
जिसको आज फफूंद खा गई।
मकड़ी जाले खैर मनाते
डब्बों पर भी धूल छा गई। 
बिस्तर पर तेरा चाय का लाना
आलस भी देख डराता था।
पेपर लाकर हाँथ में देना 
दुनिया की सैर कराता था।
सब के सब तब कद्र करेंगे
जब जीवन संगिनी खो देंगे।
एक कविता ऐसी लिखूँगी 
पढ़कर सारे रो देंगे।


याद करोगे वो दीवाली 
जब उसने साड़ी नहीं ली थी।
चौके में शक्कर कम देखके
फीकी चाय भी पी ली थी।
उस रात का ठसका याद करोगे
खबराकर पीठ सहलाई थी।
याद करोगे मुफलिसी के वो दिन
महीनों पिक्चर नहीं दिखाई थी।
प्रिय ना घूमो तारों में अकेली
कहोगे ,तेरे साथ हम हो लेंगे।
एक कविता ऐसी लिखूँगी 
पढ़ कर सारे रो देंगे।

ना बेटे ना बहुऐं संग में 
प्रिय तुम बहुत सताती हो।
नहीं कर सका ख्वाहिशों को पूरी
ख्वाबों में रोज बताती हो।
तुम बिन सूनी हैं दहलीजे 
तुम बिन दुनिया वही रूक गई ।
बहुत अकड़ता था मैं तुमसे
वो अकड़ी हुई कमर झुक गई।
लौट आओ, तेरेअरमानो की गठरी
अपनी पलकों पर ,हम ढो लेगे।
एक कविता ऐसी लिखूँगी 
पढ़कर सारे रो देंगे।


पन्ने दर पन्ने उसे लिखोगे
जब जीवन में स्याही कम होगी।
आँसुओं से होगी,  पूरी इबारत 
यादों से आँखें नम होंगी।
इक मौका मांगोगे गिड़गिड़ा के
आ जाओ! हम पापों को धो लेंगे।
एक कविता ऐसी लिखूँगी 
पढ़कर सारे रो देंगे।
जीवन का कटु सत्य लिखूँगी 
अपना आपा खो देंगे।



सीमा शिवहरे" सुमन"
भोपाल
seemashivhare02@gmail.com

Hindi Shayri by Seema Shivhare suman : 111048001
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