Hindi Quote in Story by Divya Sharma

Story quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

लघुकथा

सात वचन
________

सोलह शृंगार में सजी नवविवाहिता पिया के इंतजार में बैठी थी
बेशकीमती चंद्रहार, हीरे की अंगूठी, रत्न जड़ित कंगन।
रूनझुन करती पायल।
सभी खुद पर गर्वित थे।चंद्रहार की लखदख चमक से गले में सजा मंगलसूत्र कुछ दब सा रहा था।बिंदियाँ अपने को कम आंक रही थी।
अपनी कीमती होने के अभिमान में चूर चंद्रहार ने कहा...
"देखो मेरे होने से गोरी के रूप में चारचांद लग गए हैं।मेरी कीमत दुल्हन के रूतबे को बढा रही हैं। ।तुम सबने देखा मुझे देख वह कैसे खुश हो गई थी।"घंमड में वह बोला।
"चंद्रहार तुम्हें नहीं मालूम क्या!मैं बेहद प्रिय हूँ तभी तो मुझे शान से वह अपनी कलाई में पहनती है।"कंगन ने कहा।

"हुँऊ...!"पायल ने मुँह सिकोड़ा।"कुछ भी कह लो तुम सब।लेकिन रोज रात्रि तुम्हें अलग कर देती हैं खुद से।लेकिन मैं तो अक्सर ही बजती हूँ उनके पैरों में।"
सबकी बातें सुन बेचारी बिछियां अपने आप में सिकुड़ने लगी।
तभी एक एक करके शरीर से शृंगार अलग होने लगा।कंगन अब मेज पर था।चंद्रहार सिरहाने पड़ा था।
चुभन महसूस कराती पायल बिस्तर के कोने पर।
पर माथे पर सजी बिंदियाँ, मांग का सिन्दूर ,बिछियां और मंगलसूत्र सात वचनों को निभाते अपनी जगह मौजूद थे।

दिव्या राकेश शर्मा।

Hindi Story by Divya Sharma : 111043053
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now