माँफ करना, अगर मेरा कोई गीत चल नहीं पाया तो,
आपकी समझ में नहीं आया तो,
सोशल मीडिया में टिक नहीं पाया तो,
अख़बार-मैगज़ीन में छप नहीं पाया तो
कुछ गीत मैंने खुद के लिए लिखे है,
कुछ सीखने के लिए लिखे है,
कुछ खुद को सीखाने के लिए लिखे है
माँफ करना, अगर मेरा गीत आपके मन को छू नहीं पाया तो
उसका सौंदर्य समझ नहीं आया तो
कुछ गीत मैंने अपने मन को छूने के लिए लिखे है
किसी को दिखाने के लिए नहीं,
खुद देखने के लिए लिखे है
कुछ मेरे भीतर के द्वन्द है,
कुछ मेरे अधूरे गढ़े छंद है,
अनुशासन और आकर से दूर है,
अपने ही मद में चूर है
माँफ करना, अगर मेरा कोई गीत दौड़ नहीं पाया तो
आपको किसी दुविधा में कंही छोड़ आया तो
वैसे ये गीत का इरादा तो नहीं था
उसे खुद नहीं पता
वो क्या था, क्या नहीं था
ये आधे छूटे, थोड़े टूटे, ये मेरे गीत
मेरे काव्यालय के पन्ने है,
आपके न सही, पर मेरे स्याही-पुत्र है, मेरे अपने है
माँफ करना अगर कोई अनचाहा अलंकार लग गया तो
व्याकरण के पैमाने में, छट गया तो
हो सकता है, ये मेरा गीत, ऊँघते ऊँघते लिखा गया होगा
कवि लिखते लिखते सो गया होगा
हो सकता है, विचार तेज बहे होंगे
ये गीत भी साथ में बह गया होगा
हो सकता है, की ये जिस कागज में लिखा गया होगा
वो बारिस में भींग गया होगा
माँफ करना, अगर में उन अक्षरों को पहचान नहीं पाया तो
आप तक सही से पंहुचा नहीं पाया तो