शसक की दया
अभी बाकी है तुममें
काफी जान |
देखो अभी भी
सर उठा पा रहे हो
नजरें मिला रहे हो
बीच बीच में कुछ
कह भी लेते हो
तुम्हारी आह में अभी भी
वो बात नहीं है |
इसका मतलब है कि नहीं हुई है
तुम पर अभी जुल्म की इन्तेहाँ
अभी गुंजाइश बाकी है
और टैक्स लगाने की
और घेरने की,
बाजू मरोड़ने की |
गिर जाओ , उठ के खड़े न हो पाओ
हाथ भी न उठें - न इबादत को , न बगावत को
कंठ से आवाज़ भी न निकले
पलकें उठाना भी भारी हो जाए
लगे कि जान अब गयी तब गयी
जीवन मृत्यु से बदतर लगे -
तब मुझसे कहना
मैं तुम पर दया करूँगा |