प्रतिज्ञा हम सब भारतीय है यह प्रतिज्ञा हम रोज लेते थे। जब हम बच्चे थे ,तब स्कूल मे रोज यह प्रतिज्ञा करवाई जाती थी । होने में तो आज भी यह प्रतिज्ञा करवाई जाती हैं लेकिन ज्यो ज्यो बड़े होते गए उन शब्दों को भूलतेे गए क्या वो स्कूल वाली प्रतिज्ञा हम याद नही रख सकते हैं और बातें तो हम सब याद रखते हैं। समस्त भारतीय मेरे भाई बहन हैं ,ये लाइन हम ने फर्स्ट क्लास से लेकर 12 वी क्लास तक तो रोज अपने मुँह से बोली हैं फिर कैसे भूल गये कि ये बच्चियां, युवतियां हमारी बहन समान है फिर क्यों आज का युवा इनकी इज्जत करना भूल गए, हम सभ्य समाज मे रहते है । पर आज के सामाजिक प्राणी ने नैतिकता को तो शायद किताबो का बोरिंग चेप्टर समझ कर छोड़ ही दिया । क्या हमारे बच्चे नैतिकता से इतने दूर हो चले ,शायद इसके लिये हम स्वयं भी जिम्मेदार हैं। जिम्मेदारी स्कूलों की या टीचर की ही नही होती ,हर मातापिता की भी बनती हैं ।बच्चों को सही गलत की परख करवाना ,बेटियों की इज्ज़त करना आदि । इस प्रतिज्ञा का अर्थ हमे आज की युवा पीढ़ी को पुनः याद करवाने की सख्त आवश्यकता है। अंजली धाभाई ,सीकर (राजस्थान)