है क्या एक दोस्त आज मैं आपको समझाता हूँ,
दोस्ती के वास्तविक अर्थ से मैं, आपको परिचित कराता हूँ,
पड़ी हो भारी भीड़ या कोई विकट आपत्ति,
साथ न हो जब जीवन में, कोई भी साथी संगी;
ऐसी अवस्था में दोस्त आगे बढ़कर आता है,
भरी विपत्ति से भी, अपने दोस्त को आजाद कराता है,
किसी जाति, धर्म या वंश से उसकी पहचान ना होती है,
उस दोस्त की सच्ची दोस्ती ही एक मिशाल होती है।
हर खूनी रिश्ते से ऊपर होता है होद्दा जिसका,
गंगा जल के जैसा पवित्र होता है सच्चे दोस्त का रिश्ता,
बहती रहती है सदा जिसकी निर्मल पवित्र धारा,
होता है वो दोस्त जग में सबसे निराला,
पग-पग पर दोस्ती निभाने के लिए मचलता हो दिल जिसका,
होता है वो दोस्त वास्तव में मन का सच्चा,
ऐसा दोस्त मिलना जग में एक मुकाम पाने के समान है,
थाम लो ऐसे दोस्त का हाथ अगर वो आपके साथ है।।
~CP~