समय.... !
जो गुज़रा हैं, गुज़रता है, गुज़रनेवाला हैं तुझ से
न कर अफ़सोस तू उसका जो बस में हैं नहीं तेरे...
हुआ ना है किसीका आज़तक वो है बड़ा ज़ालिम
गवाह इतिहास हैं इसका नज़र के सामने तेरे..
हुए गारत उसी के गर्त में सुरमा, बड़े पंडित
भले हो शाह सिकंदर दफ़न हैं सामने तेरे...
न जाना जानकी के नाथ ने, ना श्यामसुन्दर ने
जो छिपा काल के भीतर, सबक हैं सामने तेरे...
समय अच्छा, बुरा, ज्यादा के कम होता नहीं यारों
जो करले कद्र उसकी तो, समय है साथ में तेरे...
समय तो रेत है, रहता सरकता बंध मुठ्ठी से
भूला के कल, जी ले ये पल, जीवन हैं हाथमें तेरे...
©️ देवांशु पटेल
शिकागो
10 /13 /2018