कुछ लोग पुरानी सडक
खोदकर नई सडक बना रहे थे
मैने कहाँ .. संभलकर ऐ दोस्त
कही मिल न जाए
टुटे फुटे मिट्टीके बचपन के खिलोंने
क्यों की ये वही सडक है
जो मेरे गाँव से होकर गुजरती है ।
कुछ लोग पुरानी सडक
खोदकर नई सडक बना रहे थे
मैने कहाँ ..आहिस्ता ऐ दोस्त
कही ये मिट्टी हिसाब न माँग बैठे
जब खेल कुद के जख्म पर हम
मिट्टी रोंदा करते थे
दर्द चुटकियोंमें भुलाया करते थे
उस मिट्टी का दर्द मिटा सके
ऐसा मरहम इंसान आजतक बना नही पाया
संभलकर वार करना ऐ दोस्त
क्यों की ये वही सडक है
जो मेरे गाँव से होकर गुजरती है ।
- साधना वालचंद कस्पटे © ☘