आज भी दिल मे मेरे कोई बात अधुरी है....
बिना चाँद के वो चाँदनी रात अधुरी है....
कुछ अनकही, कुछ अनसुनी बातों की,
मुलाकात अधुरी है....
मै भिंग जाऊ तुम्हारे उन अश्कों मे,
अभी वो बरसात अधुरी है...
कभी हारे, कभी सिमटे, कभी लिपटे हुए,
वो जज़बात अधुरे है....
कुछ मेरे कुछ तुम्हारे खुशियोंकी,
वो सुहानी सौगात अधुरी है...
गुंजती है शहनाईयाँ कानो मे,
फिर भी वो बारात अधुरी है...
कभी दोस्ती कभी प्यार,
अभी तेरे मेरे इस बेनाम रिश्ते की शुरवात अधुरी है.....
आज भी दिल मे मेरे कोई बात अधुरी है....
बिना चाँद के वो चाँदनी रात अधुरी है....