। संबंध ।
हर किसी की एक दुनिया है
एक कोना हर किसी ने दे रखा है
अपनी दुनिया में मुझे_
कृपा है उस की हर कोई
चाहता है मुझे एक कोने-सा
उड़ने की लेकिन नहीं है अनुमति,
फुदक लुँ जितना जी चाहे
उस एक कोने में
मुझे भी चाहिए
आकाश जितना समेट पाए मेरी पाँखै
और कभी कुछ देर रह भी लू उसकी भी दुनिया के
एक कोने में जब चाहूँ...
पर नहीं हर कोई अपनी दुनिया के एक कोने मे मुझे रख कर हो जाना चाहता है खुद मेरी समूची दुनिया।